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Monday, December 27, 2010

लाल रंग का छोटा गुल्लक

बचपन के दिन याद आये तो एक लाल रंग का गुल्लक घर ले आईI 
बड़ी उँगलियों में फंसा मिटटी का गुल्लक अब बहुत छोटा लगता हैI
इंतज़ार है ऊस दिन का जब ज़मीन साफ़ कर, पैसों से भरे गुल्लक को ज़ोर से दे मारना हैI
फ़र्क होगा तो बस उँगलियों के स्पर्श का...
...क्यूंकि अब सिक्के नहीं, दस-दस रूपये के नोट निकलेंगे.